ज्ञानमार्गी शाखा के कवि और उनकी रचनाएँ

इस शाखा के प्रवर्तक कवि कबीरदास हैं । इस धारा के प्रमुख कवि और उनकी रचनाओं की संक्षिप्त जानकारी नीचे प्रस्तुत है :-
  1. कबीर दास : इनका मूल ग्रंथ बीजक है । इसके तीन भाग हैं : पहला भाग साखी है, जिसमें दोहे हैं । दूसरे भाग में शब्द हैं जो गेयपद हैं । तीसरा भाग रमैनी का है जिसमें सात चौपाई के बाद एक दोहा आता है । इसके अतिरिक्त कबीर ग्रंथावली और श्री आदि ग्रंथ में भी इनके पद मिलते हैं । इनकी भाषा को एक अलग ही नाम मिल गया है - सधुक्कड़ी भाषा का ।
  2. रैदास या रविदास :रैदास की बानी । इनके पद और दोहे भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब, आदि ग्रंथ आदि में मिलते हैं । इनकी भाषा में फारसी शब्दों की प्रधानता है ।
  3. गुरु नानक देव : जपुजी साहिब, सिद्धगोष्ठी, आसा दी वार, दत्तिसनी ओंकार, बारहमाहा, मझ दी वार, मलार की वार । आपकी भाषा में ब्रज,गुरुमुखी और नागरी का पुट है ।
  4. नामदेव : संत नामदेव के पद भी आदि ग्रंथ में संकलित हैं । इनकी भाषा मराठी है ।
  5. संत दादू-दयाल : हरडे वाणी, अंगवधु । आपकी भाषा राजस्थानी मिश्रित पश्चिमी हिंदी है ।
  6. सुंदर दास : इनकी रचनाएँ सुंदर ग्रंथावली में मिलती हैं । इनकी भाषा ब्रज है ।
  7. संत मलूक दास : इनकी मुख्य रचनाएँ हैं : ज्ञानबोध,रतनबोध, भक्त रामावतार, वंशावली, भक्त विरुदावली, पुरुष विलास, गुरु-प्रताप, अलख बानी, दस-रत्न । आपकी भाषा अरबी, फारसी मिश्रित हिंदी है ।
  8. दया बाई
  9. सहजो बाई
  10. दरियादास
  11. संत पलटूदास
  12. संत चरणदास
  13. धरमदास
  14. रज्जब
  15. जगजीवन
  16. वाजिद
  17. यारी
  18. दूलन दास
  19. संत लाल
  20. भीखा
  21. गुलाल
  22. शेख फरीद

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